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Madar ki jad (Money attraction)
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- मदार की जड़ को कमर में बांधने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- मदार की जड़ को अभिमंत्रित करके दाहिनी भुजा पर बांधने से सौभाग्य बढ़ता है।
Description
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मदार जड़ Madar Jad (Madar Root) सूर्य ग्रह (Sun Planet)
- इसको ‘मंदार’, ‘आक’, ‘अर्क’ और ‘अकौआ’ भी कहते हैं। बिहार और झारखंड के कुछ इलाकों में इसे ‘अकवन’ के नाम से जाना जाता है।
- ज्योतिष शास्त्र में मदार का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य से है।
- इस दिव्य जड़ी को विधिवत् धारण करने से सूर्य ग्रह जनित सभी दोषों का समन होता है एवं भगवान भास्कर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- ज्योतिष शास्त्र में मदार के पौधे और इसकी जड़ को कई फ़ायदों से जोड़ा गया है।
- मदार की जड़ को कमर में बांधने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
- मदार की जड़ को अभिमंत्रित करके दाहिनी भुजा पर बांधने से सौभाग्य बढ़ता है।
- मदार के पौधे की जड़ को लाल धागे से बांधकर रोगी के पैर में बांधने से फ़ीलपांव में आराम मिलता है।
- मदार के पौधे को घर के सामने लगाने और नियमित रूप से पूजा करने से धन की कमी दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
- मदार के पौधे को घर के अग्नि कोण यानी कि दक्षिण पूर्व के बीच दक्षिण या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए।
- मदार के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ़्लेमेटरी गुण होते हैं। इन पत्तों का इस्तेमाल करने से चोट जल्दी भरती है और बवासीर में भी आराम मिलता है।
- रविपुष्प नक्षत्र में लाई गई मदार की जड़ को दाहिने हाथ में धारण करने से आर्थिक समृधि में वृद्धि होती हैं।
- रविपुष्प में उसकी मदार की जड़ को बंध्या स्त्री भी कमर में बंधे तो संतान होगी।
- अगर किसी जातक पर तांत्रिक अभिकर्म किया गया है, तो मदार जड़ का एक टुकड़ा अभिमंत्रित करके कमर में बांधने से तांत्रिक क्रिया निष्फल हो जाती है।
- अगर कोई व्यक्ति गंभीर रोग से ग्रसित है, तो रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में मदार की जड़ को या बंध्या स्त्री अपनी कमर में बांध ले, तो उसे सन्तान का सुख अवश्य मिलेगा।
- अगर विवाह के काफी साल गुजर गए हैं और अभी तक बच्चे की किलकारियां आंगन में नहीं गूंजी हैं, तो शुक्रवार के दिन मदार पेड़ की जड़ को उखाड़ लें और फिर उसको उस कमरे में बांध दें, जिसकी संतान न हो रही हो।
- धारण विधि – रविवार के दिन मदार जड़ को सुबह पंचामृत – (कच्चा दूध गाय का, दही, शुद्ध घी, मधु एवं चीनी) से धोने के उपरांत गंगा जल से इस जड़ी को पवित्र करें फिर गंध (चंदन/रोड़ी/कुमकुम), अक्षत (चावल), पुष्प, धूप, दीप एवं नवेद (प्रसाद) से पूजन करें एवम सूर्य मंत्र (“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः”) मंत्र का 108 बार जाप कर जड़ी को लाल कपड़े में लपेटकर अपनी दाहिनी भुजा में बांध लें।
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